इटावा: पंजीकरण के नाम पर रिश्वतखोरी का जाल, विजिलेंस के शिकंजे में फंसे डिप्टी सीएमओ
पीड़ित की शिकायत पर बिछाया गया जाल, सीएमओ कार्यालय में रंगे हाथों पकड़े गए अधिकारी; स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

जनपद के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले का खुलासा होने के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। जिला क्षय रोग अस्पताल में तैनात नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. श्रीनिवास यादव को विजिलेंस टीम ने कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक हलकों में दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा।
मामले के अनुसार, थाना ऊसराहार क्षेत्र निवासी नवीन कुमार ने अपनी पत्नी के नाम से एक अल्ट्रासाउंड सेंटर के पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने और आवेदन मानकों पर खरा उतरने के बावजूद पंजीकरण जारी करने के नाम पर डिप्टी सीएमओ द्वारा भारी धनराशि की मांग की गई।
पीड़ित का आरोप है कि 30 मार्च 2026 को हुई सलाहकार समिति की बैठक में उसका आवेदन स्वीकृति योग्य पाया गया था, लेकिन इसके बावजूद पंजीकरण नहीं किया गया। आरोप है कि डिप्टी सीएमओ और संबंधित अधिकारियों ने पंजीकरण प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए पहले 5 लाख रुपये की मांग की। दबाव और मानसिक उत्पीड़न के बीच पीड़ित ने कथित तौर पर 2.50 लाख रुपये की राशि भी दी, लेकिन इसके बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ी।
बताया जाता है कि बाद में अतिरिक्त धनराशि की मांग जारी रही, जिससे परेशान होकर पीड़ित ने उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद उसने कानपुर स्थित विजिलेंस टीम से भी शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। उपलब्ध साक्ष्यों, रिकॉर्डिंग और तथ्यों के आधार पर जाल बिछाया गया। बुधवार को जब शिकायतकर्ता को सीएमओ कार्यालय बुलाया गया और कथित रिश्वत की शेष राशि ली जा रही थी, तभी पहले से मौजूद विजिलेंस टीम ने डिप्टी सीएमओ डॉ. श्रीनिवास यादव को रंगे हाथ पकड़ लिया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी को मेडिकल परीक्षण और पूछताछ के लिए अपने साथ ले जाया गया। विजिलेंस टीम अब मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जिस अधिकारी के कंधों पर जनस्वास्थ्य और जनता के विश्वास की जिम्मेदारी थी, उसी पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगने से आमजन में नाराजगी और निराशा का माहौल है। पूरे जिले में यह मामला चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।




