
इटावा। जनपद इटावा के विठ्ठल आश्रम टिक्सी मंदिर स्थित निर्माणाधीन श्री दस महाविद्या पीठ में रविवार को एक भव्य एवं ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर ज्योतिष्पीठाधीश्वर, अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का पावन आगमन हुआ। उनके आगमन से सम्पूर्ण आश्रम परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठा।जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज के स्वागत हेतु बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा, गौभक्त, सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। वैदिक रीति-रिवाजों, पुष्पवर्षा एवं जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। श्रद्धालुओं ने उनके दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा धर्म और संस्कृति के संरक्षण हेतु उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने गौमाता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रजीवन की आधारशिला हैं। भारतीय सभ्यता में गौवंश का स्थान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण अंग रहा है।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं एवं गौभक्तों को गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के लिए जनजागरण अभियान चलाने तथा गौरक्षा एवं गौसंवर्धन के लिए जीवनपर्यंत कार्य करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि गौमाता भारतीय जीवन-दर्शन की प्रतीक हैं और उनका संरक्षण राष्ट्रहित से जुड़ा हुआ विषय है।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में शंकराचार्य जी महाराज ने जनपद इटावा में एक भव्य एवं आदर्श गोधाम स्थापित करने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए जहां गौमाता को केवल दूध उत्पादन के साधन के रूप में न देखा जाए, बल्कि उन्हें पूजनीय मातृशक्ति के रूप में सम्मान और संरक्षण प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि गौसेवा का वास्तविक उद्देश्य गौवंश का संरक्षण, संवर्धन एवं सम्मान सुनिश्चित करना है।
इस अवसर पर उन्होंने श्री पीतांबरेश्वर सरकार धाम एवं श्री दस महाविद्या पीठ के प्रमुख भक्त तथा समाजसेवी अशोक कुमार यादव ‘क्रांतिकारी’ को अपना प्रतिनिधि नियुक्त करते हुए इटावा में आदर्श गोधाम निर्माण की दिशा में आवश्यक प्रयास प्रारंभ करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व एवं सहयोग से जनपद में गौसेवा और गौरक्षा का यह अभियान नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा तथा समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री पीतांबरेश्वर सरकार धाम (दस महाविद्या पीठ) के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी शिवम जी महाराज ने कहा कि इटावा की धरती आज वास्तव में धन्य हो गई है। उन्होंने कहा कि यह सम्पूर्ण क्षेत्र का सौभाग्य है कि ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के पावन चरण इस पवित्र पीठ पर पड़े हैं।
स्वामी शिवम जी महाराज ने कहा कि शंकराचार्य जी महाराज के आगमन से धर्म, संस्कृति, गौरक्षा एवं राष्ट्रभक्ति की भावना को नई ऊर्जा प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि श्री दस महाविद्या पीठ सदैव धर्म, संस्कृति एवं गौरक्षा के कार्यों के लिए समर्पित रहेगा तथा शंकराचार्य जी महाराज के मार्गदर्शन में गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करेगा।
कार्यक्रम के दौरान संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने गौसेवा, गौरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा सनातन धर्म की रक्षा एवं संवर्धन के लिए सामूहिक संकल्प लिया। धार्मिक अनुष्ठानों, आशीर्वचनों एवं आध्यात्मिक विमर्श के बीच सम्पन्न हुए इस कार्यक्रम ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य से सम्पूर्ण विठ्ठल आश्रम टिक्सी मंदिर परिसर दिव्य एवं भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने इसे क्षेत्र के धार्मिक एवं सांस्कृतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण एवं अविस्मरणीय अवसर बताया। यह आयोजन न केवल गौसंरक्षण और सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता का संदेश देकर गया, बल्कि समाज में धर्म, सेवा और राष्ट्रहित के प्रति नई चेतना का संचार करने वाला भी सिद्ध हुआ।




