एक हजार रुपये के विवाद में नाबालिग ने रची लूट की झूठी कहानी, सीसीटीवी से खुला राज
थाना अध्यक्ष कमल भाटी की सूझबूझ से सामने आई हकीकत, समझाइश के बाद नाबालिग परिजनों के सुपुर्द

संवाददाता : मनोज कुमार
जसवंतनगर। दोस्त से लिए गए उधार के एक हजार रुपये लौटाने के दबाव से बचने के लिए एक नाबालिग द्वारा 10 हजार रुपये और मोबाइल फोन लूटे जाने की झूठी कहानी गढ़ने का मामला सामने आया है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ के आधार पर मामले की हकीकत सामने ला दी। इसके बाद नाबालिग को समझाइश देकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
थाना अध्यक्ष कमल भाटी के अनुसार, रविवार शाम नाबालिग ने पुलिस को सूचना दी कि स्कूटी और बाइक सवार कुछ लोगों ने रास्ते में उसे रोककर उसकी जेब से करीब 10 हजार रुपये और मोबाइल फोन लूट लिया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में नाबालिग के साथ उसका एक सहपाठी दिखाई दिया। पुलिस ने सहपाठी को बुलाकर पूछताछ की तो उसके बयान से कथित लूट की घटना को लेकर संदेह गहरा गया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में सहपाठी ने बताया कि नाबालिग के साथ किसी प्रकार की लूट नहीं हुई थी। इसके बाद पुलिस ने नाबालिग से भी पूरी घटना के संबंध में पूछताछ की। पूछताछ में उसने कथित तौर पर पूरी सच्चाई पुलिस के सामने स्वीकार कर ली।
नाबालिग ने पुलिस को बताया कि उसने अपने दोस्त से पांच हजार रुपये उधार लिए थे, जिसमें से चार हजार रुपये वापस कर चुका था और एक हजार रुपये अभी शेष थे। शेष रकम लौटाने को लेकर दोस्त द्वारा दबाव बनाया जा रहा था। इसी दौरान उसका मोबाइल फोन दोस्त के पास रह गया था।
पुलिस के मुताबिक, नाबालिग को डर था कि मोबाइल फोन दोस्त के पास होने की जानकारी घरवालों को होने पर उससे सवाल-जवाब किए जाएंगे। इसी डर के चलते उसने घरवालों को वास्तविकता बताने के बजाय कथित तौर पर लूट की मनगढ़ंत कहानी बना दी और पुलिस को 10 हजार रुपये तथा मोबाइल फोन लूटे जाने की सूचना दे दी।
सीसीटीवी फुटेज, सहपाठी से पूछताछ और नाबालिग के बयानों का मिलान करने के बाद पुलिस के सामने कथित लूट की सूचना की वास्तविकता सामने आ गई। थाना अध्यक्ष कमल भाटी के निर्देशन में पुलिस टीम की तत्परता और सूझबूझ से मामले का कम समय में खुलासा हो गया।
पुलिस ने नाबालिग को मामले की गंभीरता समझाते हुए भविष्य में इस तरह की झूठी सूचना देकर पुलिस को गुमराह न करने की हिदायत दी। इसके बाद आवश्यक समझाइश देकर उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
पुलिस की त्वरित जांच से स्पष्ट हुआ कि किसी भी घटना की सूचना मिलने के बाद घटनास्थल, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित लोगों के बयानों की जांच कर वास्तविक तथ्यों तक पहुंचना जरूरी है।




