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बसरेहर संवाददाता। विकासखंड बसरेहर की ग्राम पंचायतों में तैनात पंचायत सहायकों ने अपने मानदेय में कटौती, निर्धारित अधिकारों का पूर्ण लाभ नहीं मिलने और पंचायत सचिवालयों में जरूरी सुविधाओं के अभाव को लेकर आवाज बुलंद की है। पंचायत सहायकों ने सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की।
पंचायत सहायकों का कहना है कि उन्हें महज ₹6,000 प्रतिमाह मानदेय मिलता है। इसके बावजूद छुट्टियों के नाम पर मानदेय में कटौती की जा रही है। सहायकों ने सवाल उठाया कि जब इतनी कम राशि में वे ग्राम पंचायत स्तर पर लगातार विभिन्न विभागीय और ऑनलाइन कार्यों का जिम्मेदारी से निर्वहन कर रहे हैं, तो उसमें भी कटौती किया जाना उनके लिए आर्थिक परेशानी का कारण बन रहा है।

संसाधनों के अभाव में कैसे हों ऑनलाइन काम?
ज्ञापन में पंचायत सहायकों ने पंचायत सचिवालयों में भौतिक एवं तकनीकी संसाधनों की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि कई पंचायतों में इंटरनेट की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा ऑनलाइन कार्यों के लिए आवश्यक कंप्यूटर, प्रिंटर, बिजली, बैठने की व्यवस्था सहित अन्य संसाधन भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
पंचायत सहायकों का कहना है कि एक ओर उनसे ऑनलाइन योजनाओं, प्रमाण पत्रों और विभिन्न विभागीय कार्यों को समय से पूरा करने की अपेक्षा की जाती है, वहीं दूसरी ओर काम करने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जाते। ऐसे में कार्यों को समय से पूरा करने में व्यावहारिक परेशानियां सामने आती हैं।
अधिकारों का भी पूर्ण रूप से लाभ नहीं मिलने का आरोप
पंचायत सहायकों ने आरोप लगाया कि उन्हें उनके निर्धारित अधिकार और कार्य से संबंधित सुविधाएं भी पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। सहायकों का कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर उनसे लगातार काम लिया जाता है, लेकिन काम के अनुरूप अधिकार, संसाधन और आवश्यक सहयोग नहीं मिल पाने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों को लेकर भी लगाए आरोप
पंचायत सहायकों ने कुछ पंचायत सचिवों पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। सहायकों का कहना है कि जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में कथित रूप से सुविधा शुल्क के आधार पर अपने लोगों को प्राथमिकता दिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पंचायत सहायकों ने मांग की है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराकर प्रमाण पत्रों से संबंधित कार्यों में पारदर्शिता और समान व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव न हो।
मानदेय कटौती से लेकर पारदर्शिता तक उठाई मांग
पंचायत सहायकों ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि ₹6,000 के मानदेय में की जा रही कटौती पर रोक लगाई जाए, बकाया अथवा रोका गया मानदेय नियमानुसार दिलाया जाए तथा पंचायत सचिवालयों में इंटरनेट सहित सभी जरूरी भौतिक एवं तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
इसके साथ ही सहायकों ने अपने निर्धारित अधिकारों को पूर्ण रूप से उपलब्ध कराने, प्रमाण पत्रों से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा पंचायत स्तर पर कार्य करने के लिए उचित माहौल उपलब्ध कराने की मांग की है।
पंचायत सहायकों का कहना है कि ग्राम पंचायतों में सरकार की योजनाओं और ऑनलाइन सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में उनसे अपेक्षित कार्य लेने के साथ-साथ उन्हें समय पर मानदेय, निर्धारित अधिकार और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
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