
हिन्द संवाद न्यूज़ : सच का संवाद
इटावा। जिले में स्कूली वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों को लेकर परिवहन विभाग की कार्रवाई के बाद अब विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। बिना फिटनेस संचालित बताए जा रहे 132 स्कूली वाहनों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि 20 वाहनों को सीज करने की कार्रवाई की गई है।
कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर स्कूली वाहन लंबे समय से फिटनेस मानकों के अनुरूप नहीं चल रहे थे, तो अब तक इन वाहनों की नियमित जांच और निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी?
इटावा की नवागंतुक ARTO प्रवर्तन हुमा परवीन के एक्शन मोड में आने के बीच यह मामला विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा का विषय बन गया है। सवाल उठ रहा है कि पूर्व में स्कूली वाहनों की फिटनेस और चेकिंग को लेकर कितनी नियमित कार्रवाई की गई और उसका रिकॉर्ड क्या है।
वहीं, कुछ वाहन संचालकों और स्थानीय लोगों की ओर से चेकिंग एवं चालान की कार्रवाई को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ मामलों में चालान की राशि वाहन की वास्तविक कीमत और संचालक की आर्थिक क्षमता की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
पूरे मामले में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कार्रवाई की जद में आए प्रत्येक वाहन की फिटनेस स्थिति क्या थी, पूर्व में उसकी कितनी बार जांच हुई, नोटिस कब-कब जारी किए गए और संबंधित अधिकारियों द्वारा पहले क्या कार्रवाई की गई।
मामला केवल चालान और सीज करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन संचालकों पर नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है, लेकिन यदि लंबे समय तक नियमों के उल्लंघन के बावजूद प्रभावी निगरानी नहीं हुई तो विभागीय स्तर पर भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
वहीं, छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर वाहन संचालकों के साथ यदि नियमों के नाम पर मनमानी या अनुचित कार्रवाई के आरोप सामने आते हैं तो उनकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जिलाधिकारी से जांच की मांग
पूरे मामले को लेकर जिलाधिकारी इटावा से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। जांच में यह सामने आना चाहिए कि जिले में कितने स्कूली वाहन बिना फिटनेस संचालित थे, इतने समय तक उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, पूर्व में किस अधिकारी ने कितनी जांच की और वर्तमान कार्रवाई के दौरान निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया का पालन किस तरह किया गया।
जनता का सवाल सीधा है—
अगर आज कार्रवाई जरूरी थी, तो कल तक निगरानी कौन कर रहा था?
नियम सभी के लिए समान होने चाहिए और कार्रवाई भी पारदर्शी, निष्पक्ष एवं नियमानुसार होनी चाहिए।
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