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बसरेहर के प्राचीन गोपाल मंदिर में अंतिम सोमवार को उमड़ा आस्था का सैलाब, सावन मेले में रही रौनक

कस्बा बसरेहर में आस्था का प्रमुख केंद्र गोपाल मंदिर

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हिन्द संवाद न्यूज़ : सच का संवाद

बसरेहर संवाददाता। सावन मास के अंतिम सोमवार को बसरेहर कस्बा स्थित करीब 100 वर्ष पुराने गोपाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, पुष्प एवं पूजन सामग्री अर्पित की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर दिनभर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा।

गोपाल मंदिर बसरेहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा प्रमुख आस्था केंद्र है। स्थानीय जानकारी के अनुसार मंदिर करीब 100 वर्ष पुराना है। मंदिर में भगवान महादेव के साथ कई अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा-अर्चना होती है। सावन मास में यहां विशेष धार्मिक माहौल रहता है और आसपास के गांवों सहित दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं।

2002 में कराया गया मंदिर का जीर्णोद्धार

समय के साथ मंदिर की स्थिति जर्जर होने लगी थी। इसके बाद मंदिर के सर्वराकार राजेंद्र पोरवाल व प्रमोद पोरवाल ने वर्ष 2002 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। जीर्णोद्धार के बाद मंदिर को नया स्वरूप मिला और यहां धार्मिक गतिविधियां निरंतर आगे बढ़ती रहीं।

मंदिर की धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने में वर्तमान सर्वराकार परिवार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। राजेंद्र पोरवाल व प्रमोद पोरवाल के पुत्र हार्दिक पोरवाल, शिवा पोरवाल और ओमजी पोरवाल मंदिर की व्यवस्थाओं एवं धार्मिक आयोजनों से जुड़े हुए हैं और मंदिर की परंपराओं को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रहे हैं।

श्री श्री 1008 महाराज आनंद दास के सानिध्य में धार्मिक माहौल

गोपाल मंदिर से जुड़े धार्मिक आयोजनों में श्री श्री 1008 महाराज आनंद दास का सानिध्य भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का विषय है। उनके सानिध्य से मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण और अधिक भक्तिमय नजर आता है। श्रद्धालु संत-महात्मा का आशीर्वाद प्राप्त कर स्वयं को धन्य मानते हैं।

सावन मेले में सजीं दुकानें, बच्चों ने उठाया झूलों का आनंद

गोपाल मंदिर परिसर में कई वर्षों से सावन मास के दौरान मेले की परंपरा चली आ रही है। यह मेला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तक चलता है। अंतिम सोमवार को मंदिर में दर्शन के साथ मेले में भी बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ रही।

मेले में खजले की दुकानें, सॉफ्टी, दैनिक उपयोग की वस्तुएं, बच्चों के खिलौने, झूले समेत विभिन्न प्रकार की दुकानें सजी हुई हैं। बच्चों ने झूलों और खिलौनों का आनंद लिया, वहीं परिवारों ने मेले में खरीदारी की। शाम होते-होते मेले में भीड़ और बढ़ गई, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मेल-मिलाप का केंद्र

करीब एक सदी पुराना गोपाल मंदिर आज भी बसरेहर की धार्मिक विरासत को संजोए हुए है। सावन मास में लगने वाला मेला मंदिर को धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मेल-मिलाप का भी केंद्र बना देता है।

मंदिर के इतिहास और परंपरा को आगे बढ़ाने में सर्वराकार परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। राजेंद्र पोरवाल व प्रमोद पोरवाल द्वारा वर्ष 2002 में कराए गए जीर्णोद्धार के बाद उनके पुत्र हार्दिक पोरवाल, शिवा पोरवाल और ओमजी पोरवाल भी मंदिर की व्यवस्थाओं एवं धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वहीं श्री श्री 1008 महाराज आनंद दास के सानिध्य से मंदिर की धार्मिक गरिमा और बढ़ती है।

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