
इटावा। जनपद इटावा में अपने कार्यकाल के दौरान जनहित, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, दिव्यांग कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अनेक नवाचारों को सफलतापूर्वक लागू करने वाले अधिकारी ने जिले से विदाई के अवसर पर भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि “इटावा और यहां बिताया समय हमेशा याद रहेगा। यहां के लोगों का स्नेह, सहयोग और अपनापन जीवनभर नहीं भूलूंगा।”
अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य करने का अनुभव उनके लिए सीखने का अवसर रहा और उन्होंने हर संभव प्रयास किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
प्रमुख उपलब्धियां
● मिशन पंचनद:
इटावा की स्थानीय ब्रांड “पंचनद” की शुरुआत कर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया। 51 पंचनद स्टोरों में से 35 संचालित हैं और 16 प्रक्रिया में हैं। इस पहल से लगभग 125 गरीब परिवारों को रोजगार मिला तथा अब तक करीब 4 लाख रुपये की आय अर्जित हुई।
● मिशन अध्ययन:
ग्रामीण युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु 150 अध्ययन कक्ष स्थापित किए गए। चकरनगर ब्लॉक की प्रत्येक ग्राम पंचायत में लाइब्रेरी विकसित कर गांव में ही पढ़ाई की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराई गई।
● दिव्यांग प्रमाण पत्र अभियान:
दिव्यांग बच्चों को घर से अस्पताल तक लाने और वापस छोड़ने की विशेष व्यवस्था कर लगभग 1200 बच्चों के दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए गए, जबकि इससे पहले वर्षों में केवल 550 प्रमाण पत्र ही जारी हो सके थे।
● ऑपरेशन बाल आवाज:
सुनने और बोलने में असमर्थ 10 बच्चों की लगभग 6 लाख रुपये प्रति सर्जरी लागत वाली कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी निशुल्क कराई गई, जिससे उनके जीवन में नई उम्मीद जगी।
● जन्म प्रमाण पत्र अभियान:
प्रक्रिया को सरल बनाकर लगभग 14 हजार बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र घर बैठे उपलब्ध कराए गए।
● सहज अध्ययन केंद्र:
दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के लिए 6 सहज अध्ययन केंद्र संचालित किए गए, जबकि 3 अन्य केंद्र स्थापना की प्रक्रिया में हैं।
● सघन वन अभियान:
32 ग्रामों में 21 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 24 हजार पौधों का रोपण कर सघन वन विकसित किए गए। इनकी सुरक्षा के लिए तारबाड़ और सिंचाई जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गईं। इसके अतिरिक्त 40 नए सघन वन विकसित करने की प्रक्रिया जारी है।
जनता का आभार व्यक्त किया
अधिकारी ने कहा कि इन सभी प्रयासों का उद्देश्य केवल जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना था। इटावा की जनता से मिले स्नेह और विश्वास ने उन्हें निरंतर बेहतर कार्य करने की प्रेरणा दी।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि “इटावा की यादें, यहां के लोग और यहां का अपनापन हमेशा मेरे दिल में रहेगा।”
— हिन्द संवाद न्यूज़ “सच का संवाद”




