इंजेक्शन लगने के बाद गर्भवती की मौत के मामले में सीएचसी अधीक्षक पर मुकदमे के आदेश

हिन्द संवाद न्यूज़ : सच का संवाद
इटावा। बसरेहर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आठ माह की गर्भवती महिला राधना की मौत के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी कुमार प्रथम की अदालत ने सीएचसी अधीक्षक डॉ. विकास सचान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए हैं। मामला आठ जून 2026 का बताया गया है।
बसरेहर निवासी राधना के पति विपिन कुमार के अनुसार, वह आठ जून की सुबह करीब 10:46 बजे अपनी साढ़े आठ माह की गर्भवती पत्नी को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बसरेहर लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि अस्पताल में स्टाफ द्वारा बाहर से दवा और इंजेक्शन मंगवाया गया। नर्स मोनिका के बताए अनुसार इंजेक्शन लगाए जाने के कुछ देर बाद राधना की हालत बिगड़ने लगी। परिजनों के मुताबिक उसे बेचैनी, ऐंठन और आंखें लाल होने जैसी समस्या हुई।
आरोप है कि इसके बाद राधना को दूसरा इंजेक्शन भी लगाया गया, जिसके बाद उसकी हालत और गंभीर हो गई। बाद में उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों के अनुसार गर्भ में पल रहे शिशु की भी मौत हो गई।
घटना के बाद मृतका के पति विपिन कुमार ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। मामले में हुई विभागीय जांच के दौरान उपचार एवं चिकित्सकीय दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए गए। थाना बसरेहर की ओर से अदालत में प्रस्तुत आख्या में अभियोग दर्ज न होने की बात कही गई।
इसके बाद विपिन कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत अदालत में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने सीएचसी अधीक्षक डॉ. विकास सचान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए हैं।
सीएचसी अधीक्षक ने आरोपों से किया इनकार
वहीं, डॉ. विकास सचान से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा कि गर्भवती महिला की मौत में उनका कोई हाथ नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच में वह पूरा सहयोग करेंगे और जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।




