गुरु केवल शिक्षक नहीं, जीवन के पथप्रदर्शक हैं” — डॉ. नरेशपाल सिंह
गुरु पूर्णिमा पर दिया प्रेरणादायी संदेश

हिन्द संवाद न्यूज़ : सच का संवाद
इटावा/सैफई । गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शिक्षाविद् डॉ. नरेशपाल सिंह, प्रोफेसर, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी, इटावा (उत्तर प्रदेश) ने अपने विद्यार्थियों एवं समस्त समाज के नाम प्रेरणादायी संदेश जारी करते हुए भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले पथप्रदर्शक होते हैं। गुरु के मार्गदर्शन से ही व्यक्ति अज्ञान के अंधकार से निकलकर ज्ञान, संस्कार और सफलता के प्रकाश की ओर अग्रसर होता है।
डॉ. सिंह ने अपने संदेश में कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का अत्यंत पवित्र और प्रेरणादायी पर्व है, जिसे महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है। वेदों के संकलन और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप यह दिन व्यास पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। यह पर्व केवल गुरु के सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि उनके प्रति कृतज्ञता, समर्पण और उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का भी दिन है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊँचा माना गया है, क्योंकि गुरु ही मनुष्य को सही और गलत का विवेक प्रदान करते हैं। माता-पिता जीवन देते हैं, जबकि गुरु जीवन को उद्देश्य, दिशा और मूल्य प्रदान करते हैं। गुरु द्वारा दिए गए संस्कार ही व्यक्ति के चरित्र का आधार बनते हैं और उसे समाज व राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराते हैं।
अपने प्रिय विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. नरेशपाल सिंह ने कहा कि एक शिक्षक का वास्तविक दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सत्यनिष्ठा, अनुशासन, संवेदनशीलता, जिज्ञासा, आत्मविश्वास और मानवता जैसे गुणों का विकास करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे जीवनभर सीखने की जिज्ञासा बनाए रखें, प्रश्न पूछने का साहस रखें, सत्य का अनुसरण करें और अपने चरित्र को अपनी सबसे बड़ी पहचान बनाएं।
उन्होंने कहा कि उनके लिए विद्यार्थियों की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल परीक्षा में प्राप्त अंक या पुरस्कार नहीं, बल्कि उनका एक आदर्श, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनना है। जब विद्यार्थी अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज की सेवा, मानवता के उत्थान और राष्ट्र निर्माण के लिए करेंगे, तभी एक शिक्षक का जीवन सफल माना जाएगा।
डॉ. सिंह ने इस अवसर पर अपने सभी गुरुजनों के प्रति भी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जीवन में सीखने, सिखाने और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा अपने गुरुओं से ही प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि गुरु का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि उनके बताए आदर्शों और मूल्यों को जीवन में अपनाकर ही किया जा सकता है।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं नागरिकों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि सभी ज्ञान, विवेक, करुणा और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण जीवन व्यतीत करें तथा अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना सदैव बनाए रखें।




