अपनों ने ठुकराया तो रक्तदाता समूह ने निभाया इंसानियत का फर्ज
छह दिन तक मोर्चरी में रहा 55 वर्षीय रेखा देवी का शव, परिजनों ने अंतिम संस्कार से किया इंकार; यमुना घाट पर समाजसेवियों ने कराया दाह-संस्कार

हिन्द संवाद न्यूज़ : सच का संवाद
सैफई/इटावा। पारिवारिक विवाद और सामाजिक दूरी के चलते एक महिला के अंतिम संस्कार तक उसके परिजनों के सामने न आने का मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में उपचार के दौरान 55 वर्षीय रेखा देवी की मृत्यु के बाद उनके पति, तीन बेटों और मायके पक्ष के लोगों ने शव लेने से इंकार कर दिया। करीब छह दिनों तक शव को लेकर चली प्रक्रिया के बाद पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में सामाजिक संस्था ‘रक्तदाता समूह’ के सदस्यों ने इटावा स्थित यमुना घाट पर पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया।
उपचार के दौरान हुई मौत
बताया गया कि 21 अगस्त 2026 को एम्बुलेंस कर्मियों द्वारा गंभीर हालत में रेखा देवी को उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान 7 सितंबर 2026 को दोपहर 12:16 बजे उनकी मृत्यु हो गई।

मौत की सूचना के बाद सैफई थाना पुलिस ने उनके पति शिवनाथ, निवासी ग्राम कनमऊ, थाना दिबियापुर, जनपद औरैया से संपर्क किया। पुलिस की ओर से परिजनों को महिला की मृत्यु की जानकारी देकर शव लेने के लिए कहा गया, लेकिन परिजन अंतिम संस्कार के लिए सामने नहीं आए।
परिजनों ने पुरानी घटना का हवाला देकर शव लेने से किया इंकार
10 सितंबर तक जब परिवार का कोई सदस्य अस्पताल नहीं पहुंचा तो समाजसेवा में सक्रिय रक्तदाता समूह के सदस्यों ने कनमऊ गांव के ग्राम प्रधान अनमोल यादव से संपर्क किया। ग्राम प्रधान के माध्यम से शिवनाथ तथा उनके तीन बेटों आशीष (30), गोलू (25) और राधे (23) से संपर्क कर शव स्वीकार करने और अंतिम संस्कार के लिए समझाने का प्रयास किया गया।
परिजनों की ओर से बताया गया कि रेखा देवी करीब 15 वर्ष पूर्व गांव के ही एक शादीशुदा व्यक्ति संजू यादव के साथ घर छोड़कर चली गई थीं। परिजनों के अनुसार, कुछ समय पूर्व संजू यादव की मृत्यु हो गई थी और इसके बाद रेखा देवी के संबंध में परिवार को कोई जानकारी नहीं थी। इसी पुरानी पारिवारिक एवं सामाजिक खटास को परिजनों ने शव स्वीकार न करने की वजह बताया।
मायके पक्ष ने भी शव लेने से किया इंकार
पति और बेटों के इंकार के बाद रक्तदाता समूह के सदस्यों ने रेखा देवी के मायके पक्ष से भी संपर्क किया। जालौन जनपद के कुठौंद थाना क्षेत्र के ग्राम बड़ी मड़ैया निवासी उनके पिता महादेव और भाई विजेंद्र को भी महिला की मृत्यु की सूचना दी गई, लेकिन उन्होंने भी शव लेने से इंकार कर दिया।
इसके बाद 10 सितंबर को सैफई थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा की विधिक कार्रवाई पूरी की और शव को निर्धारित अवधि के लिए मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया गया। वहीं, परिजनों की तलाश के दौरान दिबियापुर थाना पुलिस जब शिवनाथ के घर पहुंची तो वहां ताला लगा मिला। बताया गया कि उनका मोबाइल फोन भी बंद था। तीनों बेटों के मोबाइल नंबर भी बंद पाए गए।
अंतिम संस्कार में शामिल होने का भी दिया अवसर
रक्तदाता समूह के संचालक शरद तिवारी ने अंतिम समय तक परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया। बताया गया कि परिजनों को वीडियो कॉल के माध्यम से अंतिम संस्कार में शामिल होने का अवसर भी दिया गया, लेकिन उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से अंतिम संस्कार देखने में भी रुचि नहीं दिखाई।
पुलिस और समाजसेवियों ने निभाया अंतिम संस्कार का दायित्व
13 सितंबर को निर्धारित 72 घंटे की अवधि पूरी होने के बाद, जब कोई विधिक वारिस सामने नहीं आया, तो सैफई पुलिस और रक्तदाता समूह के सदस्यों ने रेखा देवी के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई।
सैफई थाने की महिला कांस्टेबल नीलम यादव एवं होमगार्ड कमलेश कुमार की मौजूदगी में रक्तदाता समूह के सदस्यों राजीव लोचन दीक्षित, पंकज भदौरिया, विमलेश तिवारी, डॉ. रोहित तिवारी, राजीव नरुका, राजेश दुबे, गोपाल शुक्ला, आदित्य प्रताप, राजेश, सौरभ परिहार और शरद तिवारी ने इटावा स्थित यमुना घाट पर धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार रेखा देवी का अंतिम संस्कार कराया।
इस घटना ने एक ओर जहां पारिवारिक संबंधों और सामाजिक संवेदनाओं पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं रक्तदाता समूह के सदस्यों की पहल ने यह संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारी को निभाया जा सकता है।




