
संवाददाता : विशाल बाबू
औरैया। जिले के बहुचर्चित मंजुल चौबे-सुधा चौबे दोहरे हत्याकांड में करीब साढ़े छह साल बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने मामले में पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाइयों समेत कुल 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत का यह फैसला 19 अगस्त 2026 को आया।
मंदिर परिसर में विवाद के बाद हुई थी दोहरी हत्या
मामला औरैया शहर के नरायनपुर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 15 जनवरी 2020 को मंदिर की जमीन को लेकर विवाद हुआ था। विवाद के दौरान अधिवक्ता मंजुल चौबे और शिक्षिका सुधा चौबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया।
अभियोजन के मुताबिक, कमलेश पाठक और मंजुल चौबे के बीच पहले करीबी संबंध थे, लेकिन मंदिर की जमीन को लेकर उत्पन्न विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच संबंध खराब हो गए थे। इसी विवाद ने बाद में गंभीर रूप ले लिया।
अदालत में चली लंबी कानूनी लड़ाई
दोहरे हत्याकांड का मुकदमा विशेष एमपी-एमएलए अदालत में चला। मामले की सुनवाई लगभग छह वर्ष तक जारी रही। इस दौरान 900 से अधिक तारीखें पड़ीं और अभियोजन तथा बचाव पक्ष की ओर से बड़ी संख्या में गवाह अदालत के सामने पेश हुए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कुल 72 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करते हुए 10 आरोपियों को दोषी माना और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
इन 10 दोषियों को हुई उम्रकैद
अदालत ने जिन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, उनके नाम हैं—
1.कमलेश पाठक – पूर्व सपा एमएलसी
2. संतोष पाठक – पूर्व ब्लॉक प्रमुख
3. रामू पाठक
4. कुलदीप अवस्थी
5. विकल्प अवस्थी उर्फ चैनू अवस्थी
6. राजेश शुक्ल भगवताचार्य
7. अवनीश प्रताप सिंह – गनर
8. आशीष दुबे
9. शिवम अवस्थी
10. रविंद्र उर्फ लल्ला चौबे
अदालत ने सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

कमलेश पाठक की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी रही चर्चा में
मामले में दोषी ठहराए गए कमलेश पाठक औरैया की राजनीति में चर्चित नाम रहे हैं। वह समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे और विधान परिषद सदस्य भी रहे। उनके भाई संतोष पाठक भी स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
दोहरे हत्याकांड में कमलेश पाठक का नाम सामने आने के बाद यह मामला स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेशभर में चर्चा में आया। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मामले पर राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नजर बनी रही।
छह साल बाद आया फैसला
मंजुल चौबे और सुधा चौबे की हत्या के बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया को फैसले तक पहुंचने में करीब छह वर्ष का समय लगा। 19 अगस्त 2026 को आए अदालत के फैसले के साथ मामले में नामजद 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
पुलिस के अनुसार, मामले को प्रभावी अभियोजन और दोषसिद्धि के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत भी मॉनिटर किया गया। फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के भी पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।
नोट: यह रिपोर्ट न्यायालय के फैसले और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। दोषसिद्धि के संबंध में अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के आदेश के अनुसार ही मानी जाएगी




