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इटावा में पराली जलाने पर 30 हजार रुपये तक जुर्माना, बिना यंत्र के कंबाइन हार्वेस्टर चला तो पूरे सीजन होगा सीज

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हिन्द संवाद न्यूज़ : सच का संवाद

इटावा। धान की कटाई के दौरान फसल अवशेष यानी पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों को जागरूक करना शुरू कर दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खेत में फसल अवशेष/पराली जलाना दंडनीय अपराध है। किसानों से पराली न जलाकर उसका उचित प्रबंधन करने की अपील की गई है।

उप कृषि निदेशक सतीश कुमार पाण्डेय ने बताया कि फसल कटाई में इस्तेमाल होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रॉ रीपर, स्ट्रॉ रैक एवं बेलर अथवा अन्य फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र का प्रयोग अनिवार्य किया गया है। बिना सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के कंबाइन हार्वेस्टर चलता पाया गया तो उसे पूरे कटाई सीजन के लिए सीज किया जाएगा।

30 हजार रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति

प्रशासन की ओर से लगाए गए जागरूकता बोर्ड के अनुसार, राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम की धारा 24 एवं 26 के तहत खेत में फसल अवशेष/पराली जलाना दंडनीय अपराध है। पर्यावरण क्षतिपूर्ति के तौर पर—

2 एकड़ से कम क्षेत्र में पराली जलाने पर 5,000 रुपये प्रति घटना

2 से 5 एकड़ तक क्षेत्र में 10,000 रुपये प्रति घटना

5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 30,000 रुपये प्रति घटना

तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली जा सकती है। दोबारा उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई का भी प्रावधान है।

गोशाला में पराली देने पर खाद का लाभ

जिला प्रशासन द्वारा जनपद की संबंधित निश्चित गोशालाओं पर पराली देने और खाद लेने का अभियान भी चलाया जा रहा है। किसानों द्वारा दो ट्रॉली पराली गोशाला में दिए जाने पर एक ट्रॉली गोबर की खाद निशुल्क प्राप्त की जा सकती है।

पराली को गोशाला तक पहुंचाने के लिए ढुलाई का खर्च मनरेगा अथवा वित्त आयोग की निधि से वहन किए जाने की व्यवस्था बताई गई है।

कृषि यंत्रों पर किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान

जागरूकता बोर्ड में किसानों के लिए फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले कृषि यंत्रों के कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान बताया गया है।

किसानों को पराली प्रबंधन के लिए सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, रिवर्सिबल प्लाऊ, बेलर और पैडी स्ट्रॉ चॉपर जैसे कृषि यंत्रों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

खेत में ही पराली को खाद में बदलने की अपील

कृषि विभाग के अनुसार फसल अवशेषों को खेत में ही छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में मिलाने के बाद सिंचाई और यूरिया का प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा फसल अवशेष से नाडेप कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट भी तैयार किया जा सकता है।

इससे खेत की जलधारण क्षमता बढ़ने, लाभदायक जीवाणुओं की संख्या बढ़ने, मृदा स्वास्थ्य में सुधार और फसल उत्पादन में वृद्धि जैसे लाभ हो सकते हैं।

प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेष को आग लगाने के बजाय उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें। इससे खेत की उर्वरता बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।

जिला प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल, मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह तथा अपर जिलाधिकारी विपिन कुमार सहित कृषि विभाग द्वारा किसानों को पराली न जलाने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है।

 

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