जसवंतनगर की ऐतिहासिक मैदानी रामलीला में “श्रीरामलीला महोत्सव” में लंकापति रावण की बहन सुपणखा की लक्मण ने कान-नाक कटी
जसवंतनगर की मैदानी रामलीला में सूर्पणखा की नाक काटी, खर-दूषण और त्रिशिरा का हुआ वध

संवाददाता : मनोज कुमार
जसवंतनगर/इटावा। नगर की 167वीं ऐतिहासिक एवं विश्वविख्यात मैदानी रामलीला महोत्सव में रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का जीवंत और प्रभावशाली मंचन किया गया। लीला के दौरान सूर्पणखा की नाक काटने, खर-दूषण और त्रिशिरा के वध तथा रावण-मारीच संवाद के प्रसंगों ने दर्शकों को रामायण की घटनाओं से रूबरू कराया।
कलाकारों ने अपने अभिनय, संवाद और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से भगवान श्रीराम की मर्यादा, लक्ष्मण के पराक्रम तथा अधर्म के विरुद्ध धर्म की विजय का संदेश दिया। इन लीलाओं को देखने के लिए नगर सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और रामभक्त मैदान में पहुंचे।
*पंचवटी में श्रीराम के सामने पहुंची सूर्पणखा*
रामलीला के मंचन के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण पंचवटी में निवास कर रहे थे। इसी दौरान लंकापति रावण की बहन सूर्पणखा वहां पहुंची। भगवान श्रीराम को देखकर वह उन पर मोहित हो गई और उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रख दिया। श्रीराम ने उसके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और उसे लक्ष्मण के पास जाने के लिए कहा।
इसके बाद सूर्पणखा लक्ष्मण के पास पहुंची और उनसे विवाह करने की इच्छा जताई। लक्ष्मण ने भी उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। बार-बार असफल होने और क्रोधित होने के बाद सूर्पणखा ने माता सीता को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। इस पर लक्ष्मण ने श्रीराम और माता सीता की रक्षा करते हुए सूर्पणखा की नाक काट दी।
इस प्रसंग के मंचन के दौरान कलाकारों ने अपने अभिनय से घटनाक्रम को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया। सूर्पणखा के अपमानित होकर वहां से जाने के दृश्य ने आगे होने वाले संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार की।
*अपमानित सूर्पणखा ने खर-दूषण को सुनाई व्यथा*
नाक कटने से अपमानित और क्रोधित सूर्पणखा दंडक वन के राक्षस शासक खर-दूषण के पास पहुंची। उसने श्रीराम और लक्ष्मण द्वारा किए गए व्यवहार की जानकारी देते हुए उनसे बदला लेने के लिए उकसाया। बहन की दुर्दशा सुनकर खर-दूषण क्रोधित हो उठे और अपनी विशाल राक्षस सेना के साथ पंचवटी की ओर चल पड़े।
पंचवटी पहुंचने के बाद राक्षसों और भगवान श्रीराम-लक्ष्मण के बीच भीषण युद्ध शुरू हो गया। रामलीला के कलाकारों ने युद्ध के दृश्यों को मंच पर प्रस्तुत कर दर्शकों के सामने रोमांचक वातावरण बना दिया। युद्ध के दौरान भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने राक्षसों के आक्रमण का सामना किया और अंततः खर, दूषण तथा त्रिशिरा का वध कर दिया।
इस प्रसंग में भगवान श्रीराम के शौर्य और धर्म की रक्षा के संकल्प को प्रमुखता से दिखाया गया। युद्ध की लीला के दौरान मैदान में मौजूद दर्शक कलाकारों की प्रस्तुति को ध्यानपूर्वक देखते रहे।
*खर-दूषण के वध से रावण हुआ चिंतित*
खर-दूषण और त्रिशिरा के मारे जाने के बाद सूर्पणखा लंका पहुंची और अपने भाई रावण को पूरी घटना बताई। उसने पंचवटी में श्रीराम और लक्ष्मण के पराक्रम तथा राक्षसों की पराजय का विवरण सुनाया। अपने परिजनों के वध की खबर सुनकर रावण क्रोधित हो उठा। इसके साथ ही उसे श्रीराम की शक्ति का भी आभास हुआ।
रावण ने इस घटना के बाद अपने मामा मारीच को बुलाया और उससे विचार-विमर्श किया। रावण और मारीच के बीच हुए संवाद का मंचन रामलीला का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इसी प्रसंग के माध्यम से आगे चलकर माता सीता के हरण की घटना की भूमिका तैयार होती है।
मारीच से विचार-विमर्श और रावण की योजनाओं के इस दृश्य ने दर्शकों में आगे की रामलीला को लेकर उत्सुकता पैदा की। कलाकारों ने संवादों और अभिनय के माध्यम से कथा को क्रमबद्ध ढंग से आगे बढ़ाया।
*धर्म और अधर्म के संघर्ष का दिया संदेश*
जसवंतनगर की मैदानी रामलीला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि नगर की ऐतिहासिक सांस्कृतिक परंपरा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्षों से आयोजित हो रहे इस महोत्सव में रामायण के प्रसंगों के माध्यम से लोगों को मर्यादा, साहस, कर्तव्य, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
सूर्पणखा प्रसंग से लेकर खर-दूषण वध तक की लीला में यह दर्शाया गया कि जब अधर्म और अन्याय की शक्तियां मर्यादा को चुनौती देती हैं, तब धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष आवश्यक हो जाता है। भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के पराक्रम का लीला दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
मैदानी रामलीला महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन प्रस्तुत की जा रही लीलाओं को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्साह के बीच आयोजित यह महोत्सव जसवंतनगर की पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।
इस दौरान रामलीला समिति के प्रबंधक राजीव गुप्ता उर्फ बबलू, अजेंद्र सिंह गौर सहित समिति के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। आयोजन समिति की देखरेख में रामलीला का मंचन संपन्न हुआ।



